| Attribute | Details |
|---|---|
| Song Name | Banjare Ko Ghar |
| Singer Name | Mohammed Irfan |
| Lyrics Name | Jaani |
| Music Director | B Praak |
| Label | T-Series |
Banjare Ko Ghar Lyrics
Jise zindagi dhoondh rahee hai
Jise zindagi dhoondh rahee haiKya ye vo maqaam mera haiYaha chain se bas ruk jaoonKyon dil ye muje kehtha haiJazbaat nae is milee hainJaane kya asar ye hua haiIk aas milee phir mujkoJo kubul kisi ne kiya hai
Kisi shaayar kee ghazal, jo de rooh ko sukoon ke palKoyi mujko yoon milaa hai, jaise banjaare ko gharNaaye mausam kee sehar, ya sard mein dopaherKoyi mujko yoon milaa hai, jaise banjaare ko ghar
Muskaata ye cheharaa, detaa hai jo paharaaJaane chhupaata kya dil ka samandar
Auron ko to hardam saaya detaa haiVo dhup mein hai khada khud magarChot lagee hai use phir kyonMahsoos muje ho rahaDil too bataa de kya hai iraada tera
Main parinda besabar, tha uda jo darbadarKoyi mujko yoon milaa hai, jaise banjaare ko gharNaaye mausam kee sehar, ya sard mein dopaherKoyi mujko yoon milaa hai, jaise banjaare ko gharJaise banjaare ko ghar, jaise banjaare ko gharJaise banjaare ko ghar
Banjare Ko Ghar Lyrics In Hindi
जिसे जिंदगी ढूंढ रही है
जिसे जिंदगी ढूंढ रही है
क्या ये वो मक़ाम मेरा है
यहां चैन से बस रुक जाऊं
क्यों दिल ये मुझे कहता है
जज़्बात नई है मिली है
जाने क्या असर ये हुआ है
इक आस मिली फिर मुझको
जो कुबूल किसी ने किया है
क्या ये वो मक़ाम मेरा है
यहां चैन से बस रुक जाऊं
क्यों दिल ये मुझे कहता है
जज़्बात नई है मिली है
जाने क्या असर ये हुआ है
इक आस मिली फिर मुझको
जो कुबूल किसी ने किया है
किसी शायर की ग़ज़ल, जो दे रूह को सुकून के पल
कोई मुझको यूं मिला है, जैसे बंजारे को घर
नये मौसम की सहर, या सर्दी में दोपहर
कोई मुझको यूं मिला है, जैसे बंजारे को घर
कोई मुझको यूं मिला है, जैसे बंजारे को घर
नये मौसम की सहर, या सर्दी में दोपहर
कोई मुझको यूं मिला है, जैसे बंजारे को घर
मुस्कुराता ये चेहरा, देता है जो पहरा
जाने छुपाता क्या दिल का समंदर
जाने छुपाता क्या दिल का समंदर
औरों को तो हरदम साया देता है
वो धूप में है खड़ा खुद मगर
चोट लगी है फिर क्यों
महसूस मुजे हो रहा
वो धूप में है खड़ा खुद मगर
चोट लगी है फिर क्यों
महसूस मुजे हो रहा
दिल भी बता दे क्या है इरादा तेरा
मैं परिंदा बेसबर, था उड़ा जो दरबदर
कोई मुझको यूं मिला है, जैसे बंजारे को घर
नये मौसम की सहर, या सर्दी में दोपहर
कोई मुझको यूं मिला है, जैसे बंजारे को घर
जैसे बंजारे को घर, जैसे बंजारे को घर
जैसे बंजारे को घर
मैं परिंदा बेसबर, था उड़ा जो दरबदर
कोई मुझको यूं मिला है, जैसे बंजारे को घर
नये मौसम की सहर, या सर्दी में दोपहर
कोई मुझको यूं मिला है, जैसे बंजारे को घर
जैसे बंजारे को घर, जैसे बंजारे को घर
जैसे बंजारे को घर

