| Attribute | Details |
|---|---|
| Song Name | Humnava |
| Singer Name | Mithoon and Papon |
| Lyrics Name | Humnava Lyrics |
| Music Director | Jeet Gannguli |
| Label | T-Series |
Humnava Lyrics
Ae humnava, mujhe apna bana leSookhi padi dil ki is zameen ko bhiga deHmm, hoon akela, zara haath badha deSookhi padi dil ki is zameen ko bhiga de
Kab se main dar-dar phir rahaMusafir dil ko panaah deTu aavaargi ko meri aaj thehra de
Ho sake toh thoda pyaar jata deSookhi padi dil ki is zameen ko bhiga de
Murjhaai si shaakh pe dil ki, phool khilte hain kyun?Baat gulon ki, zikr mehek ka achchha lagta hai kyun?
Un rangon se tune milayaJinse kabhi main mil na paayaDil karta hai tera shukriyaPhir se bahaarein tu laa de
Dil ka soona banjar mehka deSookhi padi dil ki is zameen ko bhiga deHmm, hoon akela, zara haath badha deSookhi padi dil ki is zameen ko bhiga de
Waise toh mausam guzre hain zindagi mein kayiPar ab na jaane kyun mujhe woh lag rahe hain haseen
Tere aane par jaana maineKahin-na-kahin zinda hoon mainJeene laga hoon main ab ye fizayeinChehre ko chhooti hawayein
Inki tarah do qadam toh badha leSookhi padi dil ki is zameen ko bhiga deHo, hoon akela, zara haath badha deSookhi padi dil ki is zameen ko bhiga de
Humnava Lyrics In Hindi
ए हमनवा, मुझे अपना बना ले
सूखी पड़ी दिल की इस ज़मीन को भीगा दे
हम्म, हूं अकेला, जरा हाथ बढ़ा दे
सूखी पड़ी दिल की इस ज़मीन को भीगा दे
कब से मैं डर-डर फिर रहा
मुसाफिर दिल को पनाह दे
तू आवारगी को मेरी आज ठहर दे
हो सके तो थोड़ा प्यार जता दे
सूखी पड़ी दिल की इस ज़मीन को भीगा दे
मुरझाई सी शाख पे दिल की, फूल खिलते हैं क्यों?
बात गुलों की, जिक्र महक का अच्छा लगता है क्यों?
उन रंगों से तूने मिलाया
जिनसे कभी मैं मिल ना पाया
दिल करता है तेरा शुक्रिया
फिर से बहारें तू ला दे
दिल का सूना बंजर महका दे
सूखी पड़ी दिल की इस ज़मीन को भीगा दे
हम्म, हूं अकेला, जरा हाथ बढ़ा दे
सूखी पड़ी दिल की इस ज़मीन को भीगा दे
वैसे तो मौसम गुज़रे हैं जिंदगी में
पर अब ना जाने क्यों मुझे वो लग रहे हैं हसीन
तेरे आने पर जाना मैने
कहीं-ना-कहीं जिंदा हूं मैं
जीने लगा हूं मैं अब ये फ़िज़ाएं
चेहरे को छूटी हवाएं
इनकी तरह दो क़दम तो बढ़ा ले
सूखी पड़ी दिल की ज़मीन है को भीगा दे
हो, हूं अकेला, जरा हाथ बढ़ा दे
सूखी पड़ी दिल की इस ज़मीन को भीगा दे
सूखी पड़ी दिल की इस ज़मीन को भीगा दे
हम्म, हूं अकेला, जरा हाथ बढ़ा दे
सूखी पड़ी दिल की इस ज़मीन को भीगा दे
कब से मैं डर-डर फिर रहा
मुसाफिर दिल को पनाह दे
तू आवारगी को मेरी आज ठहर दे
हो सके तो थोड़ा प्यार जता दे
सूखी पड़ी दिल की इस ज़मीन को भीगा दे
मुरझाई सी शाख पे दिल की, फूल खिलते हैं क्यों?
बात गुलों की, जिक्र महक का अच्छा लगता है क्यों?
उन रंगों से तूने मिलाया
जिनसे कभी मैं मिल ना पाया
दिल करता है तेरा शुक्रिया
फिर से बहारें तू ला दे
दिल का सूना बंजर महका दे
सूखी पड़ी दिल की इस ज़मीन को भीगा दे
हम्म, हूं अकेला, जरा हाथ बढ़ा दे
सूखी पड़ी दिल की इस ज़मीन को भीगा दे
वैसे तो मौसम गुज़रे हैं जिंदगी में
पर अब ना जाने क्यों मुझे वो लग रहे हैं हसीन
तेरे आने पर जाना मैने
कहीं-ना-कहीं जिंदा हूं मैं
जीने लगा हूं मैं अब ये फ़िज़ाएं
चेहरे को छूटी हवाएं
इनकी तरह दो क़दम तो बढ़ा ले
सूखी पड़ी दिल की ज़मीन है को भीगा दे
हो, हूं अकेला, जरा हाथ बढ़ा दे
सूखी पड़ी दिल की इस ज़मीन को भीगा दे

